बुधवार, 3 जून 2020

रोजगार और गरिमामय जीने के अधिकार पर जनमत तैयार हो-व्यास

*क्या १२ करोड़ लोगो के रोजगार समाप्त हो जायेंगे ?व्यास*

आज भारत ही नहीं पूरी दुनिया में रोजगार संकट आया हुआ है,

2008 में भी विश्व व्यापी मंदी का असर से अभी दुनिया उभरी ही नहीं कि आज दुनिया आपातकाल जैसे हालात पैदा हो गए है, दुनिया सहित भारतीय की खरीद क्ष्यमता बहुत कम हो गयी है उधोग कृषि की प्रगति उत्साह वर्धक नहीं है सेवा क्षेत्र ने भी कुछ विदेश मुद्रा कमाने में भारतीय अर्थव्यवस्था की मदद की थी, लघु, अति लघु, कुटीर उधोग का प्रदर्शन भी निराशा जनक ही रहा आज भारत सरकार ने कथित 12 लाख करोड़ का पैकेज दिया है उसमे से 13 लाख करोड़ तो सीधे उधोग क्षेत्र के एकाउंट में चले जायेंगे, प्रवासी श्रमिकों असंगठित श्रमिकों किसानो और खेत मजदूरों को क्या मिलेगा ये स्पष्ट नहीं है,

उपभोक्ता वस्तु एवं सेवाओं की मांग आम आदमी या असंगठित क्षेत्र के लोगों की क्रय शक्ति पर निर्भर कराती है जीवन उपयोगी वास्तु और सेवाए खरीदने में भी बीपीएल ही नहीं माध्यम वर्ग भी सक्षम नहीं रहा है सरकारे खुद्द उपभोक्ता को जी एस टी की आड़ में लूट ही रही है, श्रमिक आंदोलन, उपभोक्ता, किसान आंदोलन अप्रभावी होते जा रहे है, कल्याणकारी और सामाजिक सुरक्षा के कानूनों को पिछले गेट से ख़त्म किये जा रहे है, श्रमिक शोषण, अत्याचार अब और बढ़ेगा, किसानो को फसल का लाभकारी मूल्य अब भी नहीं मिलेगा आगामी 2 वर्ष में आम आदमी कष्ट ही भोगेगा !कुछ लोग इसे भी ईश्वरीय इच्छा या हरी करे जो खरी कह के स्वीकार करने की भावुक अपील करेंगे!श्रमिक, गरीब और वंचित वर्ग की आवाज उठाने वालो को अर्बन नक्सली या वाम मार्गी...

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मंगलवार, 2 जून 2020

स्वास्थ्य शिक्षा से ही समाज महामारी से जीत पायेगा-व्यास

*पहला सुख निरोगी काया सुख एंटी में माया-व्यास*

1. भारतीय प्राचीन समाज व्यवस्था के अनुसार आदमी की उम्र 100 वर्ष तक की हुआ करती थी, 25 अध्ययन अध्यापन में ही समय व्यतीत करता था आदमी !ब्रह्म चारी रह कर ज्ञान विज्ञान कला संस्कृति सामाजिक व्यवहार का व्यावहारिक व्यान प्राप्त करता था, आदमी कठोर परिश्रम करता था, सवेदन शील रह कर समाज के सुख दुःख में ही अपना सुख दुःख खोजता था, स्वास्थ्य, साफ सफाई शुद्ध आहार विहार पर ध्यान देता था, प्रकृति से जुड़ा रहा कर व्यक्ति अपने को और पर्यावन को पाक साफ रखता था, पशु पक्षी, चर चराचर से निकटस्थ रिश्ते थे, व्यक्ति प्रकृति मित्र था दुश्मन नहीं, और आज मनुष्य प्रकृति पर विजय प्राप्ति का दम्भ भरता है, आवश्यकता अविष्कार की जननी है जैसे मनुष्य के जीवन में कठिनाईया आई तो उसने ही कठिनाइयों का समाधान ज्ञान विज्ञान अनुभव से खोजा ! आज समाज महामारी से बुरी तरह पीड़ित है, समस्या का रास्ता भी इन्ही तख़लीफ़ो में से ही निकल आएगा, स्वास्थ्य के मोर्चे पर सम्पूर्ण भूमण्डलवासी संघर्षरत है, अस्वस्थ्य नहीं का मतलब पूर्ण स्वस्थ है ये अर्थ नहीं लगा सकते है, शारीरिक मानसिक सामाजिक स्वास्थ्य भी ठीक होना जरुरी है, आज सभी मोर्चे पर मनुष्य जाती अस्वस्थ्य है, आज समाज में स्वास्थ्य शिक्षा पर सा से ज्यादा काम करने की आवश्यकता है आज ग्राम स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता कहाँ है जिन्हे हमने ट्रेनिंग कराई थी ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन क्या कर रहा है आज उनकी ज्यादा आवश्यकता है राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अपनी प्रभावी भूमिका निर्वाह करे,

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सोमवार, 1 जून 2020

शिक्षा बचाओ ,देश बनाओ -व्यास

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शिक्षा को बचाना जरुरी है, क्यों कि शिक्षा पर ही भविष्य निर्भर करेगा-व्यास

भारत में कभी शिक्षा गुरुकुल पद्धति से दी जाती थी, गुरु शिष्य परंपरा थी, गुरुकुल या आश्रम समाज के सक्रीय आर्थिक सहयोग से ही संचालित होते थे, शिष्य गुरु के आदेश को ईश्वरीय आदेश मानकर उसका पूर्ण

निष्ठां से पालन करता था, गुरु शिष्य का अहंकार तोड़ने क...

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शुक्रवार, 29 मई 2020

सोशियल मीडिया के लिए आचार सहिंता बनाने का वक्त आ गया है-व्यास

*सोसियल मिडिया के लिए आचार सहित बनाकर लागु कराने का वक्त आ गया-व्यास*

आज सोसियल मिडिया ऑपरेटर का नाम पत्ता पहचान स्पष्ट होनी ही चाहिए, ताकि मिडिया का नफ़रत फैलाने और राजनैतिक स्वार्थो के लिए दूरूपयोग न हो सके, आज राजनैतिक पार्टी और उनके आई टी सलाहकारों ने बोगस आई डी का इस्तेमाल कर भी उन्माद फैलाने के काम को अंजाम दिया है, नामी गरामी लोगों तक की आई डी का दुरूपयोग हो रहा है पुलिस राजनैतिक प्रभाव में होने से आरोपियों के विरुद्ध भी प्रभावी कार्यवाही न कर लीपापोती ही कराती है पुलिस दखल अंदाजी योग्य मामलों में पुलिस का दखल न देना समय पर कार्यवाही न करना, और समय पर अदालतों में मामले पेश न करने से भी सोसियल मिडिया का आपराधिक कार्य में इस्तेमाल हो रहा है कई बार अच्छे और प्रभावी कार्य करने वाले सोसियल मिडिया को प्रताड़ित और जलिज भी किया जाता है, सत्ता और प्रशासन द्वारा !सत्ता और प्रशासन के खिलाफ जन हित की अवहेला के मामले उजागर करने के प्लेटफॉर्म भी जरुरी है ताकि सत्ता और प्रशासन की जवाबदेही निश्चित की जा सके, जनता में जागरूकता पैदा करने जन समस्या समाधान के लिए भी ऐसे मंचो की आवश्यकता है,

आज सोसियल मिडीया को अपराधी गिरोह वाईट कालर अपराधियों से मुक्ति का वक्त आ गया है, आईये और सोसियल मिडिया आचार सहित के लिए पहल करे ताकि पेड़ मिडिया बनने से बचा सके,

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न्याय प्राप्त करना व्यक्ति का नैसर्गिक अधिकार है-व्यास

मनुष्य का न्याय प्राप्त करना नैसर्गिक, संवेधानिक और कानूनी अधिकार है, प्राचीन काल में भी राजा को न्याय का देवता माना जाता था, शास्त्रों में भी उल्लेख है की आतताई अय्यास राजा को सत्ता से हटाने को न्याय सम्मत कृत्य ही मन गया था, आचार्य शुक्राचार्य, चाण्यक्य, गौतम ऋषि, महर्षि वाल्मीकि वेद व्यास ने न्याय सम्मत आचरण व्यवहार की की राजा से उम्मीद की है, न्याय होना ही नहीं चाहिए बक्ली दिखाना भी चाहिए की न्याय हो रहा है !अलाउद्दीन खिलजी के समय भी खाद्य वस्तुओ में मिलावट को मृत्यु दंड के योग्य अपराध मन जाता था, टेक्स भी राज्य को न्याय सम्मत ही वसूल करना चाहिए, राजा भोज की न्याय व्यवस्था, जहांगीर का न्याय इतिहास, महाराणा कुम्भा की न्याय व्यवस्था चर्चित थी, आजाद भारत में सामान्य परिस्थितियों में न्याय व्यवस्था संतोषजनक रही है परन्तु आपातकाल में उच्चतम न्यायलय तक देश में नागरिक अधिकारों की रक्षा ही कर पाई, भारत में आपातकाल अन्याय का काल खण्ड ही कहा जायेगा क्यों की आपातकाल में सत्ता का खुला दुरूपयोग मनमाने पन का काल ही कहा जायेगा, आज का काल खंड जिसमे न्यायपालिका की भूमिका संतोषजनक नहीं कही जाएगी क्यों की नवरीको के मुलभुत अधिकारों की रक्षा इस दोर में होनी चाहिए थी वैसी नहीं हो रही है, प्रवासी श्रमिक गरीब और वंचित वर्ग को आवास, स्वास्थ्य, आजीविका से वंचित होना पड़ रहा है, परतु न्यायपालिका सरकारों से सार्थक जावाब तलब कर वंचित को न्याय नहीं दिला पा रही है, नागरिक अधिकारों की रक्षा का सविधान में दायित्व न्यायपालिका का ही है उसे भी जनता की अदालत में जवाबदेह ठहराना होगा, 
कोई भी समाज यदि न्याय से वंचित होगा तो वहॉ अराजकता ही पैदा होगी ,