*सत्ता का नशा आजीवन रहता है भले ही दूसरा नशा उतर जाये -व्यास*
आज अन्तर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस और भारत में आपातकाल विरोधी दिवस भी है, मेने आज 19 मार्च 20 के बाद नशा मुक्ति केंद्र चित्तोड़ में नशा मुक्ति केंद्र पर एडिक्ट्स पर्सन्स को सम्बोधित किया, यूं तो में टेक्नीकल और लीगल एडवाइजर हूँ तो सेशन लेता ही हूँ, पर आज विशेष अनुभव के साथ बोल रहा था, जो लोक डाउन में ही हुआ ! मुझे लगा था कि शराब, अफीम, चरस, गांजे से नशा आता है, पर लग रहा है कि सत्ता सम्पति पद का नशा भी काम खतरनाक नहीं होता है !
आपातकाल के वो दिन मुझे याद आ गए जब आज ही के दिन देश में आतंरिक आपातकाल श्रीमती इंदिरा गान्धी ने देश पर थोपा था, और लोकतंत्र नजरबन्द हो गया, स्वतन्त्र प्रेस गूंगी बना दी गयी, लोकतंत्र समर्थको की आवाज दबाने के लिए जेलों में ठूस दिया गया, पुलिस सत्ता के इशारो पर आम जनता में लोकतंत्र समर्थको का साथ न दे, ऐसा भय पैसा कर रही थी, कि साथ दिया तो तुम्हारी भी ऐसी ही दशा होगी !
सत्ता के इशारो पर प्रशासन निर्दयी हो चला था, लोगो को 19 महीनो जेलों में रहना पड़ा रासुका में ! इंदिराजी पर सत्ता का दुरूपयोग कर जीत जाने का मुकद्दमा चल था, इलहाबाद हाई कोर्ट में और वो मुकद्दमा हारी भी, और फिर सत्ता की ताकत के नशे में असपतकाल आया सामने !
इतने बरसो बाद भी सत्ताधीशो ने कुछ ज्यादा नहीं सीखा है, जो उस समय जेलों में थे, आज उनमे से कई लोग सत्ता में है, लोकतंत्र सविधान न्यायालय के प्रति मन से सम्मान कितने लोगों का है, जो सत्ता में है या सत्ता में आने के इच्छुक है ?
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