शुक्रवार, 26 जून 2020

सत्ता का नशा ज्यादा खतरनाक है शराब से भी -व्यास

*सत्ता का नशा आजीवन रहता है भले ही दूसरा नशा उतर जाये -व्यास*

आज अन्तर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस और भारत में आपातकाल विरोधी दिवस भी है, मेने आज 19 मार्च 20 के बाद नशा मुक्ति केंद्र चित्तोड़ में नशा मुक्ति केंद्र पर एडिक्ट्स पर्सन्स को सम्बोधित किया, यूं तो में टेक्नीकल और लीगल एडवाइजर हूँ तो सेशन लेता ही हूँ, पर आज विशेष अनुभव के साथ बोल रहा था, जो लोक डाउन में ही हुआ ! मुझे लगा था कि शराब, अफीम, चरस, गांजे से नशा आता है, पर लग रहा है कि सत्ता सम्पति पद का नशा भी काम खतरनाक नहीं होता है !

आपातकाल के वो दिन मुझे याद आ गए जब आज ही के दिन देश में आतंरिक आपातकाल श्रीमती इंदिरा गान्धी ने देश पर थोपा था, और लोकतंत्र नजरबन्द हो गया, स्वतन्त्र प्रेस गूंगी बना दी गयी, लोकतंत्र समर्थको की आवाज दबाने के लिए जेलों में ठूस दिया गया, पुलिस सत्ता के इशारो पर आम जनता में लोकतंत्र समर्थको का साथ न दे, ऐसा भय पैसा कर रही थी, कि साथ दिया तो तुम्हारी भी ऐसी ही दशा होगी !

सत्ता के इशारो पर प्रशासन निर्दयी हो चला था, लोगो को 19 महीनो जेलों में रहना पड़ा रासुका में ! इंदिराजी पर सत्ता का दुरूपयोग कर जीत जाने का मुकद्दमा चल था, इलहाबाद हाई कोर्ट में और वो मुकद्दमा हारी भी, और फिर सत्ता की ताकत के नशे में असपतकाल आया सामने !

इतने बरसो बाद भी सत्ताधीशो ने कुछ ज्यादा नहीं सीखा है, जो उस समय जेलों में थे, आज उनमे से कई लोग सत्ता में है, लोकतंत्र सविधान न्यायालय के प्रति मन से सम्मान कितने लोगों का है, जो सत्ता में है या सत्ता में आने के इच्छुक है ?

आ...

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मंगलवार, 9 जून 2020

आत्म विश्वास जागृत करिए

*Iआत्म विश्वास हो तो हम असंभव दिखने वाले काम को कर सकते है -व्यास*

1. आत्म विश्वास वो ताकत है जो हमें शक्तिमान बना देता है आत्म विश्वास व्यक्ति में खुद को पहचान लेले के बाद भी आता है ! में स्कूल समय तक भाषण देना नहीं जनता था, संगीत, डांस और स्टेज अभिनय कर रहा था, कॉलेज में आने के बाद ही मेने हिंदी वाद विवाद प्रतियोगिता के लिए अपने को तैयार कर पाया हाँ मुझे बहुत कठिनाईयों का सामना करना पड़ा क्यों मै हिंदी भाषा साहित्य से नहीं जुड़ा था वाणिज्य का विद्यार्थी था फिर भी मेने तय कर लिया की कॉलेज की तरफ से अंतर् महाविद्यालय हिंदी वादविवाद प्रतियोगिता में प्रतिनिधित्व करूँगा ! आखिर किया और आज तक पीछे मुड़कर नहीं देखा कि कितना रास्ता तय कर लिए है, अच्छे वक्त के लिए अच्छा अध्यनशील होना भी आवश्यक है, भाषा जिसमे आप बोलते है उसमे भी आपको निष्णात योग्यता हासिल करनी पड़ती है, साथ ही आपका प्रस्तुतीकरण बहुत प्रभावी होना चाहिए ताकि अनायास ही लोग आपकी और आकृष्ट हो जाये,

2. मेने 24 शील्ड राज्य स्तर पर और 3 बार राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम द्वितीय रहा, आज तक लगभग 5000 बार सार्वजानिक मंचो पर वक्तव्य दे चूका हूँ, मुझे स्व.श्री अटल बिहारी जी, श्री वीपी सिंह जी श्री चंद्र शेखर जी जैसे दिग्गजों की मौजूदगी भी अपनी बात रखने का ज़वसर मिला,

3. ये सब में क्यों बता रहा हूँ ताकि नया व्यक्ति मंच फोबिये पीड़ित हो वो आत्म विश्वास हासिल कर ले आज भी में नियमित पढ़ता हूँ, लिखता भी हूँ और चिंतन भी करता हूँ विभिन्न विषयो पर पढ़ना बोलना मुझे पसंद है, आशुभाषण ने मुझे आत्म विश्व...

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बुधवार, 3 जून 2020

रोजगार और गरिमामय जीने के अधिकार पर जनमत तैयार हो-व्यास

*क्या १२ करोड़ लोगो के रोजगार समाप्त हो जायेंगे ?व्यास*

आज भारत ही नहीं पूरी दुनिया में रोजगार संकट आया हुआ है,

2008 में भी विश्व व्यापी मंदी का असर से अभी दुनिया उभरी ही नहीं कि आज दुनिया आपातकाल जैसे हालात पैदा हो गए है, दुनिया सहित भारतीय की खरीद क्ष्यमता बहुत कम हो गयी है उधोग कृषि की प्रगति उत्साह वर्धक नहीं है सेवा क्षेत्र ने भी कुछ विदेश मुद्रा कमाने में भारतीय अर्थव्यवस्था की मदद की थी, लघु, अति लघु, कुटीर उधोग का प्रदर्शन भी निराशा जनक ही रहा आज भारत सरकार ने कथित 12 लाख करोड़ का पैकेज दिया है उसमे से 13 लाख करोड़ तो सीधे उधोग क्षेत्र के एकाउंट में चले जायेंगे, प्रवासी श्रमिकों असंगठित श्रमिकों किसानो और खेत मजदूरों को क्या मिलेगा ये स्पष्ट नहीं है,

उपभोक्ता वस्तु एवं सेवाओं की मांग आम आदमी या असंगठित क्षेत्र के लोगों की क्रय शक्ति पर निर्भर कराती है जीवन उपयोगी वास्तु और सेवाए खरीदने में भी बीपीएल ही नहीं माध्यम वर्ग भी सक्षम नहीं रहा है सरकारे खुद्द उपभोक्ता को जी एस टी की आड़ में लूट ही रही है, श्रमिक आंदोलन, उपभोक्ता, किसान आंदोलन अप्रभावी होते जा रहे है, कल्याणकारी और सामाजिक सुरक्षा के कानूनों को पिछले गेट से ख़त्म किये जा रहे है, श्रमिक शोषण, अत्याचार अब और बढ़ेगा, किसानो को फसल का लाभकारी मूल्य अब भी नहीं मिलेगा आगामी 2 वर्ष में आम आदमी कष्ट ही भोगेगा !कुछ लोग इसे भी ईश्वरीय इच्छा या हरी करे जो खरी कह के स्वीकार करने की भावुक अपील करेंगे!श्रमिक, गरीब और वंचित वर्ग की आवाज उठाने वालो को अर्बन नक्सली या वाम मार्गी...

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मंगलवार, 2 जून 2020

स्वास्थ्य शिक्षा से ही समाज महामारी से जीत पायेगा-व्यास

*पहला सुख निरोगी काया सुख एंटी में माया-व्यास*

1. भारतीय प्राचीन समाज व्यवस्था के अनुसार आदमी की उम्र 100 वर्ष तक की हुआ करती थी, 25 अध्ययन अध्यापन में ही समय व्यतीत करता था आदमी !ब्रह्म चारी रह कर ज्ञान विज्ञान कला संस्कृति सामाजिक व्यवहार का व्यावहारिक व्यान प्राप्त करता था, आदमी कठोर परिश्रम करता था, सवेदन शील रह कर समाज के सुख दुःख में ही अपना सुख दुःख खोजता था, स्वास्थ्य, साफ सफाई शुद्ध आहार विहार पर ध्यान देता था, प्रकृति से जुड़ा रहा कर व्यक्ति अपने को और पर्यावन को पाक साफ रखता था, पशु पक्षी, चर चराचर से निकटस्थ रिश्ते थे, व्यक्ति प्रकृति मित्र था दुश्मन नहीं, और आज मनुष्य प्रकृति पर विजय प्राप्ति का दम्भ भरता है, आवश्यकता अविष्कार की जननी है जैसे मनुष्य के जीवन में कठिनाईया आई तो उसने ही कठिनाइयों का समाधान ज्ञान विज्ञान अनुभव से खोजा ! आज समाज महामारी से बुरी तरह पीड़ित है, समस्या का रास्ता भी इन्ही तख़लीफ़ो में से ही निकल आएगा, स्वास्थ्य के मोर्चे पर सम्पूर्ण भूमण्डलवासी संघर्षरत है, अस्वस्थ्य नहीं का मतलब पूर्ण स्वस्थ है ये अर्थ नहीं लगा सकते है, शारीरिक मानसिक सामाजिक स्वास्थ्य भी ठीक होना जरुरी है, आज सभी मोर्चे पर मनुष्य जाती अस्वस्थ्य है, आज समाज में स्वास्थ्य शिक्षा पर सा से ज्यादा काम करने की आवश्यकता है आज ग्राम स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता कहाँ है जिन्हे हमने ट्रेनिंग कराई थी ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन क्या कर रहा है आज उनकी ज्यादा आवश्यकता है राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अपनी प्रभावी भूमिका निर्वाह करे,

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सोमवार, 1 जून 2020

शिक्षा बचाओ ,देश बनाओ -व्यास

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शिक्षा को बचाना जरुरी है, क्यों कि शिक्षा पर ही भविष्य निर्भर करेगा-व्यास

भारत में कभी शिक्षा गुरुकुल पद्धति से दी जाती थी, गुरु शिष्य परंपरा थी, गुरुकुल या आश्रम समाज के सक्रीय आर्थिक सहयोग से ही संचालित होते थे, शिष्य गुरु के आदेश को ईश्वरीय आदेश मानकर उसका पूर्ण

निष्ठां से पालन करता था, गुरु शिष्य का अहंकार तोड़ने क...

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