सोमवार, 20 जुलाई 2020

जस्टिस कृष्ण अय्यर वो सख्सियत थे जिन्होंने न्यायपालिका को गौरवान्वित किया -व्यास

जस्टिस वीआर कृष्णा अय्यर : जिनके फैसले मिसाल हैं और मशाल भी

https://satyagrah.scroll.in/article/122363/justice-vr-krishna-iyer-profile-hindi
जस्टिस कृष्णा अय्यर मेरे आदर्श है।मेने इनकी अध्यक्षता में सेव एज्युकेशन में काम किया है।आप मानवतावादी व्यक्ति थे-व्यास

गुरुवार, 2 जुलाई 2020

पहले इंसान बने बाद में कुछ भी बन जाना - व्यास

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जीवन मे ऐसा कुछ करने का संकल्प ले,कि जिससे जीवन  सार्थक हो जाये,दुसरो के लिए भी अवश्य कुछ तो करे,ताकि मनुष्य होने का प्रमाण दे सके,हमारे न होने का लोगों कुछ अहसास तो हो,अन्यथा दुनिया मे करोड़ो लोग है जो इस लिए जी रहे है क्यो वो आसानी से मर भी नही सकते है। जीना है तो मरना सीखो,कदम कदम पर लड़ना सीखो।अन्याय का विरोध करो,ओर न्याय के ही कुछ करते रहो-व्यास #✍️राजनीतिक चर्चाएं 

शुक्रवार, 26 जून 2020

सत्ता का नशा ज्यादा खतरनाक है शराब से भी -व्यास

*सत्ता का नशा आजीवन रहता है भले ही दूसरा नशा उतर जाये -व्यास*

आज अन्तर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस और भारत में आपातकाल विरोधी दिवस भी है, मेने आज 19 मार्च 20 के बाद नशा मुक्ति केंद्र चित्तोड़ में नशा मुक्ति केंद्र पर एडिक्ट्स पर्सन्स को सम्बोधित किया, यूं तो में टेक्नीकल और लीगल एडवाइजर हूँ तो सेशन लेता ही हूँ, पर आज विशेष अनुभव के साथ बोल रहा था, जो लोक डाउन में ही हुआ ! मुझे लगा था कि शराब, अफीम, चरस, गांजे से नशा आता है, पर लग रहा है कि सत्ता सम्पति पद का नशा भी काम खतरनाक नहीं होता है !

आपातकाल के वो दिन मुझे याद आ गए जब आज ही के दिन देश में आतंरिक आपातकाल श्रीमती इंदिरा गान्धी ने देश पर थोपा था, और लोकतंत्र नजरबन्द हो गया, स्वतन्त्र प्रेस गूंगी बना दी गयी, लोकतंत्र समर्थको की आवाज दबाने के लिए जेलों में ठूस दिया गया, पुलिस सत्ता के इशारो पर आम जनता में लोकतंत्र समर्थको का साथ न दे, ऐसा भय पैसा कर रही थी, कि साथ दिया तो तुम्हारी भी ऐसी ही दशा होगी !

सत्ता के इशारो पर प्रशासन निर्दयी हो चला था, लोगो को 19 महीनो जेलों में रहना पड़ा रासुका में ! इंदिराजी पर सत्ता का दुरूपयोग कर जीत जाने का मुकद्दमा चल था, इलहाबाद हाई कोर्ट में और वो मुकद्दमा हारी भी, और फिर सत्ता की ताकत के नशे में असपतकाल आया सामने !

इतने बरसो बाद भी सत्ताधीशो ने कुछ ज्यादा नहीं सीखा है, जो उस समय जेलों में थे, आज उनमे से कई लोग सत्ता में है, लोकतंत्र सविधान न्यायालय के प्रति मन से सम्मान कितने लोगों का है, जो सत्ता में है या सत्ता में आने के इच्छुक है ?

आ...

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आभार - GyanApp

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